Open Interest (OI) उन डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की संख्या है जो अभी भी खुले हैं: किसी ने खरीदे और किसी और ने बेचे, और अभी तक बंद या एक्सपायर नहीं हुए। यह भारतीय Option chain पर सबसे ज़्यादा देखे जाने वाले आँकड़ों में से एक है, और सबसे ज़्यादा गलत समझे जाने वाले आँकड़ों में से भी।
OI कैसे बदलता है
हर ट्रेड में एक खरीदार और एक विक्रेता होता है। OI बदलेगा या नहीं, यह इस पर निर्भर है कि दोनों में से हर कोई पोज़िशन खोल रहा है या बंद कर रहा है।
| खरीदार | विक्रेता | OI पर असर |
|---|---|---|
| नई पोज़िशन खोलता है | नई पोज़िशन खोलता है (राइट करता है) | OI ट्रेड हुई मात्रा जितना बढ़ता है |
| नई पोज़िशन खोलता है | मौजूदा Long पोज़िशन बंद करता है | कोई बदलाव नहीं: पोज़िशन एक होल्डर से दूसरे के पास चली जाती है |
| मौजूदा Short पोज़िशन बंद करता है | नई पोज़िशन खोलता है (राइट करता है) | कोई बदलाव नहीं |
| मौजूदा Short पोज़िशन बंद करता है | मौजूदा Long पोज़िशन बंद करता है | OI ट्रेड हुई मात्रा जितना घटता है |
Expiry पर उस कॉन्ट्रैक्ट का सारा OI शून्य हो जाता है, क्योंकि हर कॉन्ट्रैक्ट या तो सेटल होता है या एक्सपायर हो जाता है।
OI बनाम वॉल्यूम
- वॉल्यूम एक प्रवाह है: आज कितने कॉन्ट्रैक्ट ट्रेड हुए। यह हर दिन फिर से शुरू होता है।
- Open Interest एक जमा आँकड़ा है: दिन के आखिर में कितने कॉन्ट्रैक्ट बकाया हैं। यह एक दिन से अगले दिन तक आगे चलता रहता है।
- ज़्यादा वॉल्यूम के साथ OI में मामूली बदलाव का मतलब है कि पोज़िशन ज़्यादातर हाथ बदल रही हैं। ज़्यादा वॉल्यूम पर OI बढ़ने का मतलब है कि नई पोज़िशन बन रही हैं।
- Expiry के करीब वीकली इंडेक्स Options में वॉल्यूम OI का कई गुना हो सकता है, क्योंकि वही कॉन्ट्रैक्ट दिन भर बार-बार ट्रेड होते हैं।
चार बिल्डअप पैटर्न
भारत में बाज़ार की कमेंट्री अक्सर कीमत की दिशा और OI की दिशा को मिलाकर चार लेबल बनाती है। ये Futures से आए हैं, जहाँ इन्हें समझना आसान है।
| कीमत | Open Interest | लेबल | Futures में आम मतलब |
|---|---|---|---|
| ऊपर | ऊपर | Long बिल्डअप | नए खरीदार आ रहे हैं |
| नीचे | ऊपर | Short बिल्डअप | नए विक्रेता आ रहे हैं |
| ऊपर | नीचे | Short कवरिंग | विक्रेता वापस खरीदकर पोज़िशन बंद कर रहे हैं |
| नीचे | नीचे | Long अनवाइंडिंग | खरीदार बेचकर पोज़िशन बंद कर रहे हैं |
Options को पढ़ना क्यों मुश्किल है
Option के लिए "कीमत ऊपर" का मतलब Premium से है, जो इंडेक्स, समय और इम्प्लाइड वोलैटिलिटी के साथ बदलता है। OI बढ़ने के बावजूद Call का Premium सिर्फ़ समय बीतने की वजह से गिर सकता है। और हर नए Option कॉन्ट्रैक्ट में एक नया खरीदार और एक नया राइटर दोनों होते हैं, इसलिए सिर्फ़ OI बढ़ने से यह पता नहीं चलता कि कौन-सी तरफ़ ज़्यादा उत्सुक थी।
किसी Strike पर OI क्या बता सकता है और क्या नहीं
एक आम आदत है कि सबसे ज़्यादा OI वाले Call Strike को "रेज़िस्टेंस" और सबसे ज़्यादा OI वाले Put Strike को "सपोर्ट" माना जाए, इस सोच के साथ कि Option राइटर उन स्तरों का बचाव करेंगे। इसमें कुछ तर्क है: बड़ी खुली पोज़िशन का मतलब है कि कई लोगों को उस स्तर की परवाह है। लेकिन इसके भरोसेमंद रुकावट की तरह काम करने के सबूत कमज़ोर हैं, कई कारणों से:
- OI से आप यह नहीं जान सकते कि कौन Long है और कौन Short, या पोज़िशन Futures या दूसरे Options से हेज की गई हैं या नहीं।
- बड़ा OI अक्सर राउंड नंबरों पर होता है, सिर्फ़ इसलिए कि वे Strike लोकप्रिय हैं।
- दिन के दौरान पोज़िशन बदलती रहती हैं; सुबह जिस स्तर पर बड़ा OI था, दोपहर तक वह OI अनवाइंड हो सकता है।
- इंडेक्स की चाल Options की पोज़िशनिंग से कहीं ज़्यादा चीज़ों से तय होती है।
OI के व्यावहारिक इस्तेमाल
- लिक्विडिटी। अच्छे-खासे OI और वॉल्यूम वाले Strike में आमतौर पर spread कम होता है और उनसे निकलना आसान होता है।
- संदर्भ। कुल OI बढ़ना दिखाता है कि भागीदारी बढ़ रही है; Expiry के पास OI गिरना सामान्य है, क्योंकि पोज़िशन रोल या बंद होती हैं।
- पोज़िशन लिमिट। एक्सचेंज और SEBI तय करते हैं कि कोई क्लाइंट कितना OI रख सकता है, और स्टॉक F&O पर मार्केट-वाइड लिमिट लागू होती है। जो स्टॉक अपनी मार्केट-वाइड पोज़िशन लिमिट पार कर लेते हैं, वे बैन पीरियड में चले जाते हैं, जिसके दौरान आप सिर्फ़ पोज़िशन घटा सकते हैं।
OI के आँकड़े कहाँ से आते हैं
एक्सचेंज हर दिन के आखिर में हर कॉन्ट्रैक्ट का Open Interest जारी करते हैं, और सेशन के दौरान Option chain इंट्राडे स्नैपशॉट दिखाती है। इंट्राडे OI के आँकड़े हर ट्रेड के साथ नहीं, बल्कि समय-समय पर अपडेट होते हैं, इसलिए कुछ मिनट के अंतर पर देखी गई दो स्क्रीन अलग आँकड़े दिखा सकती हैं। फ़ैसलों के लिए एक्सचेंज या अपने ब्रोकर के आँकड़ों पर भरोसा करें, और ध्यान रखें कि वे किस समय लिए गए थे।
OI एक विवरण है, सिग्नल नहीं
कोई भी OI पैटर्न अगली चाल का भरोसेमंद अनुमान नहीं देता। इसका इस्तेमाल यह समझने के लिए करें कि पोज़िशन कहाँ हैं, और सिर्फ़ इसके भरोसे ट्रेड करने के बजाय इसे अपनी जोखिम सीमाओं के साथ जोड़ें।
उदाहरणों में दी गई रकम सिर्फ़ समझाने के लिए है, यह मौजूदा मार्केट डेटा नहीं है। यह सामान्य शिक्षा है, निवेश सलाह नहीं।