SEBI एक स्टडी प्रकाशित करता है कि इक्विटी Futures और Options में व्यक्तिगत ट्रेडर्स का हाल कैसा रहता है। हर साल नतीजे मिलते-जुलते रहे हैं।
| निष्कर्ष | आँकड़ा |
|---|---|
| नेट नुकसान वाले व्यक्तिगत ट्रेडर | 87.7% |
| व्यक्तिगत ट्रेडर्स का नेट नुकसान | ₹91,685 करोड़ |
| नुकसान वाले प्रति ट्रेडर औसत नुकसान | ₹1.17 लाख |
| नुकसान में Options का हिस्सा | 92% |
| साल में व्यक्तिगत ट्रेडर | 78.6 लाख |
पिछली स्टडी में FY25 में 91% और FY22–FY24 में 93% ट्रेडर नुकसान में पाए गए थे।
नुकसान कहाँ से आता है
- हर ट्रेड पर लागत। ब्रोकरेज, STT, एक्सचेंज फीस, GST और स्टांप ड्यूटी मुनाफ़े और नुकसान, दोनों तरह के ट्रेड पर लगते हैं। छोटे Premium में बार-बार ट्रेड करने से ये दांव पर लगे पैसे का बड़ा हिस्सा बन जाते हैं।
- टाइम डिके। Option खरीदार को चाहिए कि इंडेक्स काफ़ी दूर और काफ़ी जल्दी हिले। अगर ऐसा नहीं होता, तो Premium हर दिन घटता जाता है।
- कम अवधि वाले Options। Expiry के करीब वीकली Options यूँ ही सस्ते नहीं होते: ज़्यादातर Expiry पर बेकार हो जाते हैं।
- पोज़िशन साइज़। इंडेक्स Option का एक Lot बड़ी नोशनल वैल्यू को कंट्रोल करता है। इंडेक्स में छोटी हलचल रुपयों में बड़ी हलचल बन जाती है।
- टिप्स और कॉल। किसी और की कॉल पर खरीदने से कोई बढ़त नहीं मिलती और अक्सर ऊपर से फीस लगती है।
क्या मदद करता है
ट्रेड में उतरने से पहले अपना अधिकतम नुकसान जानें, सारे चार्ज गिनें, हर पोज़िशन को अपनी पूँजी के मुकाबले छोटा रखें, और असली पैसा लगाने से पहले कागज़ पर सीखें।
उदाहरणों में दी गई रकम सिर्फ़ समझाने के लिए है, यह मौजूदा मार्केट डेटा नहीं है। यह सामान्य शिक्षा है, निवेश सलाह नहीं।