8 मिनट में पढ़ें · अपडेट: सोम, 2 नव॰ 2026

F&O ट्रेडर्स के लिए टैक्स ऑडिट: कब लागू होता है

₹1 करोड़ और ₹10 करोड़ की टर्नओवर सीमा, नए Income-tax Act के तहत 6% मुनाफ़े का सवाल, और ऑडिट की ड्यू डेट।

टैक्स ऑडिट में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट आपके अकाउंट्स की जांच करता है और फिर टैक्स डिपार्टमेंट में रिपोर्ट फ़ाइल करता है। इससे खर्च बढ़ता है और डेडलाइन पहले आती है, इसलिए यह जानना ज़रूरी है कि यह कब लागू होता है। F&O ट्रेडरों के लिए दो बातें इसे तय करती हैं: टर्नओवर, और कुछ मामलों में मुनाफ़ा टर्नओवर की तुलना में कितना है।

सामान्य जानकारी, टैक्स सलाह नहीं

यह लेख शिक्षा के लिए नियमों को सामान्य रूप में समझाता है। यह टैक्स सलाह नहीं है और हो सकता है आपकी स्थिति पर लागू न हो। टैक्स कानून और ड्यू डेट बदलते रहते हैं, और Income-tax Act, 2025 नया है, इसलिए कुछ बातों की व्याख्या अभी तय हो रही है। रिटर्न फाइल करने या कोई फ़ैसला लेने से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लें।

कौन-सा क़ानून लागू होता है

FY 2025-26 के लिए, यानी वह साल जिसके रिटर्न 2026 में भरे जा रहे हैं, नियम Income-tax Act, 1961 का सेक्शन 44AB है। टैक्स ईयर 2026-27 से यही नियम Income-tax Act, 2025 के सेक्शन 63 में है, टर्नओवर की उन्हीं सीमाओं के साथ। ऑडिट रिपोर्ट भी बदलती है: टैक्स ईयर 2026-27 से फ़ॉर्म 3CA, 3CB और 3CD की जगह एक ही फ़ॉर्म 26 आता है।

नियम 1: टर्नओवर की सीमाएँ

याद रखें कि यहाँ टर्नओवर ICAI वाला आंकड़ा है, यानी हर ट्रेड पर मुनाफ़े और नुकसान की एब्सोल्यूट वैल्यू का जोड़, कॉन्ट्रैक्ट की वैल्यू नहीं। इस हिसाब से बहुत कम रिटेल ट्रेडर ₹10 करोड़ तक पहुँचते हैं।

नियम 2: कम मुनाफ़ा और प्रिज़म्प्टिव टैक्सेशन

दूसरा ट्रिगर प्रिज़म्प्टिव टैक्सेशन से जुड़ा है (पहले सेक्शन 44AD, अब सेक्शन 58)। यह स्कीम ₹2 करोड़ तक के टर्नओवर वाले बिज़नेस के लिए, या नकद प्राप्तियाँ 5% से ज़्यादा न होने पर ₹3 करोड़ तक, डिजिटल तरीके से मिले टर्नओवर के 6% को मुनाफ़ा मान लेती है।

1961 के अधिनियम के तहत, जो अब भी FY 2025-26 पर लागू है: अगर आपने पिछले पाँच सालों में से किसी एक में प्रिज़म्प्टिव स्कीम चुनी थी और फिर उसे छोड़ दिया, और अब आप प्रिज़म्प्टिव दर से कम मुनाफ़ा दिखाते हैं जबकि आपकी कुल इनकम बेसिक छूट सीमा से ऊपर है, तो आपको ऑडिट कराना होगा। अगर आपने यह स्कीम कभी इस्तेमाल नहीं की थी, तो नुकसान या 6% से कम मुनाफ़ा दिखाने भर से ऑडिट ज़रूरी नहीं होता था।

2025 के अधिनियम के तहत, टैक्स ईयर 2026-27 से, कुछ प्रैक्टिशनर सेक्शन 58 के शब्दों का यह मतलब निकालते हैं कि हर योग्य बिज़नेस को, जो प्रिज़म्प्टिव दर से कम मुनाफ़ा दिखाता है और जिसकी कुल इनकम छूट सीमा से ऊपर है, बुक्स रखनी होंगी और ऑडिट कराना होगा, चाहे उसने कभी यह स्कीम चुनी हो या नहीं। दूसरे इसे पुरानी स्थिति बनाए रखने वाला मानते हैं। इस अपडेट तक CBDT के किसी स्पष्टीकरण ने यह मुद्दा तय नहीं किया है। अगर आपका टर्नओवर प्रिज़म्प्टिव सीमा के अंदर है और आप नुकसान या 6% से कम मुनाफ़ा दिखाते हैं, तो साल की शुरुआत में ही CA से इस पर बात करें।

जहाँ 6% वाला नियम लागू नहीं होता

अगर सभी स्रोतों से कुल इनकम बेसिक छूट सीमा (नई व्यवस्था में ₹4 लाख) के अंदर है, तो कम मुनाफ़े वाला ट्रिगर लागू नहीं होता। और अगर टर्नओवर प्रिज़म्प्टिव सीमा (ज़्यादातर डिजिटल बिज़नेस के लिए ₹3 करोड़) से ऊपर है लेकिन ₹10 करोड़ से ऊपर नहीं, तो प्रिज़म्प्टिव स्कीम उपलब्ध नहीं होती, इसलिए कम मुनाफ़े वाला नियम भी लागू नहीं होता।

एक नज़र में

यह एक आसान सारांश है। आप पर नियम कैसे लागू होते हैं, यह अपने CA से पक्का करें।
स्थिति (कम से कम 95% नॉन-कैश)ऑडिट?
₹10 करोड़ से ज़्यादा टर्नओवरहाँ, मुनाफ़ा हो या नुकसान
₹3 करोड़ से ₹10 करोड़ तक टर्नओवरनहीं, टर्नओवर के आधार पर
₹3 करोड़ तक टर्नओवर, मुनाफ़ा टर्नओवर का 6% या ज़्यादानहीं
₹3 करोड़ तक टर्नओवर, मुनाफ़ा 6% से कम, कुल इनकम छूट सीमा से ऊपर, पिछले 5 साल में प्रिज़म्प्टिव छोड़ाहाँ
यही स्थिति, लेकिन कभी प्रिज़म्प्टिव नहीं चुनाFY 2025-26 के लिए ज़रूरी नहीं; टैक्स ईयर 2026-27 से विवादित, CA से पूछें
मुनाफ़ा 6% से कम, कुल इनकम छूट सीमा के अंदरनहीं

ड्यू डेट

ऑडिट रिपोर्ट रिटर्न की ड्यू डेट से एक महीना पहले देनी होती है। FY 2025-26 (AY 2026-27) के लिए CBDT Circular No. 7/2026 ने ऑडिट रिपोर्ट की तारीख 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी, और ऑडिट वाले मामलों में रिटर्न की तारीख 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी। नए अधिनियम के तहत टैक्स ईयर 2026-27 के लिए सामान्य तारीखें हैं: ऑडिट रिपोर्ट के लिए 30 सितंबर 2027 और रिटर्न के लिए 31 अक्टूबर 2027, जब तक इन्हें बढ़ाया न जाए।

ज़रूरी होने पर ऑडिट न कराने पर टर्नओवर से जुड़ा जुर्माना लग सकता है; 1961 के अधिनियम में यह टर्नओवर का 0.5% था, अधिकतम ₹1.5 लाख। रिटर्न को डिफ़ेक्टिव (त्रुटिपूर्ण) भी माना जा सकता है।

उदाहरणों में दी गई रकम सिर्फ़ समझाने के लिए है, यह मौजूदा मार्केट डेटा नहीं है। यह सामान्य शिक्षा है, निवेश सलाह नहीं।

F&O टर्नओवर कैलकुलेटरअपना टर्नओवर निकालें और देखें कि टैक्स ऑडिट की संभावना है या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

F&O ट्रेडरों के लिए टैक्स ऑडिट की सीमा क्या है?

जब कम से कम 95% प्राप्तियाँ और भुगतान नॉन-कैश हों, जो एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाले F&O में आम बात है, तो ₹10 करोड़ टर्नओवर। वरना ₹1 करोड़। टर्नओवर ICAI वाला आंकड़ा है, यानी मुनाफ़े और नुकसान की एब्सोल्यूट वैल्यू का जोड़।

अगर F&O में नुकसान हुआ है तो क्या मुझे ऑडिट कराना होगा?

अगर आपका टर्नओवर सीमा से कम है और आपने कभी प्रिज़म्प्टिव टैक्सेशन नहीं चुना, तो सिर्फ़ नुकसान की वजह से नहीं, कम से कम 1961 के अधिनियम के तहत। टैक्स ईयर 2026-27 से नए अधिनियम के शब्दों पर विवाद है, इसलिए अगर आपकी कुल इनकम छूट सीमा से ऊपर है तो चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह लें।

कौन-सा ऑडिट फ़ॉर्म लागू होता है?

FY 2025-26 के लिए फ़ॉर्म 3CA या 3CB, साथ में 3CD। टैक्स ईयर 2026-27 से Income-tax Act, 2025 के तहत फ़ॉर्म 26।

ऑडिट रिपोर्ट की ड्यू डेट कब है?

रिटर्न की ड्यू डेट से एक महीना पहले। AY 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 किया गया था। टैक्स ईयर 2026-27 के लिए सामान्य तारीख 30 सितंबर 2027 है।

स्रोत

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